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भारत माँ हमारी है

                                                                 ये अपनी भारत माता, किसी एक की जागीर नहीं इसे निखारना, इसे तराशना केवल एक व्यक्ति का कम नहीं मिलजुल कर एक जुट होकर यदि अपना कर्त्तव्य हम जानेंगे तो अपनी सोने की चिड़िया को आज के लोग पहचानेंगे इस धरती के टुकड़े को हम भारतवासी भारत बनाते हैं ये सैनिक हर पल मर मर के इसे जीने लायक बनाते हैं सैनिक लड़ते हैं सरहद पे देश के भीतर चेतना हमे जगानी है साथ में गंगा, यमुना, हिमालय सबकी शान बचानी है उठो सपूतों माता के आज ह्रदय से नमन करो दूजों से लड़ना बंद करो अन्तः प्रकाश का चयन करो अपने माँ की आवाज़ को आज अगर पहचानोगे तो नभ के स्वर्ग को छोड़ इस धरती को स्वर्ग बना दोगे

अश्कों की कहानी

दिल के कोठर में बसा दर्द बहता है बनके अश्क कोशिश करती हूँ बहुत इन्हें रोकने की पर ये व्याकुल इज़ाज़त न दें पोंछने की ये अपनों के दर्द में भी बहते हैं अपने दर्द में भी निकल आते हैं कुछ होश नहीं इन्हें अपना ये ख़ुशी और गम दोनों में बह जाते हैं ये कन्धा ढूंढते हैं अपना स्थान बनाने को जो मिल जाए वो सहारा तो और भी व्याकुल हो जाते हैं सारी दुनिया का प्यार पाने को सपने टूटते हैं तो भी इन्ही का सहारा है अपने छूटते हैं तो भी इन्ही का आसरा है जीवन में हालात कुछ भी हों किसी का साथ हो न हो अश्कों से नाता है हमारा सबसे गहरा देते हैं ये साथ सदा चाहे दिन हो या हो सहरा

नया जीवन

अंखियन से आँसुं बहें बुझे न दिल की प्यास रंग सारे बदले बदले से सारा जहान नया सा पहले तो मेले सजते थे ढोल नगाड़े बजते थे खुशियों का सागर बहता था आँसु उसमे तैरा करते थे अब तो सब कुछ बदल गया सूरज की किरणें इतनी गहरी खुशियों का सागर सूख गया अब दुःख की मौजें लहराईं बाजों से नाता टूट गया अपनों ने कुछ ऐसा छीना पाने से नाता टूट गया सुख ने कुछ ऐसा रुख पल्टा चैन से नाता टूट गया अब टूटे नातों को जोडूँ पिछले काँटों को या छोडूं नई रात और दिन नया लेकर के शुरू करूँ जीवन नया क्या सही और क्या गलत चौराहे पर कड़ी निहारूँ किस ओर हैं जीवन की खुशियाँ किस ओर काँटों की गलियाँ 

जीवन की डोर

                                                     जीवन हमारा, जीवन का हर पल हमारा पर जीवन की, हर पल की डोर सिर्फ ऊपरवाले की ओर दिन में उजाला, रात अँधेरी बदल न सके दुनिया की फेरी पैसे को पैसा खींचे हँसी को लूटे  हँसी चाहे जितना ज़ोर लगालो कर्मों की सज़ा तो होगी पूरी धन से न ख़ुशी मिले है दिल का चैन है ज़रूरी जब तक मन न होए पावन तब तक न आए खुशियों का सावन